गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं राज्यपाल ने


लोक भवन देहरादून 25 जनवरी, 2026 | राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में राज्यपाल ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीर शहीदों को स्मरण कर श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी, भारतीय संविधान के प्रमुख शिल्पी बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर जी और संविधान निर्माताओं को नमन किया है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत हर क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप संस्कृति, रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा और सैन्य शक्ति के क्षेत्र में भारत ने विश्व मंच पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियानों के कारण भारत आज वैश्विक सप्लाई चेन में एक भरोसेमंद भागीदार बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे से लेकर सुरक्षा तक, देश एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की ओर तेजी से अग्रसर है। ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ से 80 करोड़ से अधिक लोगों को भोजन की गारंटी के साथ ही हर घर में पोषण और सम्मान सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-जी-राम-जी’ योजना गांवों में रोजगार की गारंटी देकर, ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाकर विकसित भारत की नींव को मजबूत करेगी।

राज्यपाल ने कहा कि भारत की प्रगति यात्रा में देवभूमि उत्तराखण्ड भी पूरे सामर्थ्य से सहभागी बना है। राज्य में आधारभूत ढांचे, सड़क, रेल, एयर कनेक्टिविटी, डिजिटल सेवाओं और निवेश के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वय से उत्तराखण्ड आज तेजी से विकास के नए आयाम छू रहा है।

शीतकालीन तीर्थाटन, बारहमासी पर्यटन, उत्तराखण्ड को वेडिंग डेस्टिनेशन का गंतव्य बनाने, अध्यात्म की वैश्विक राजधानी स्थापित करने, लोकल उत्पादों को बढ़ावा और एक जिला-एक मेला- प्रधानमंत्री जी द्वारा दिए गए उत्तराखण्ड के भविष्य के इस विजन के अनुरूप हम विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के माध्यम से प्राप्त ₹3.56 लाख करोड़ के एमओयू में से ₹1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश धरातल पर उतर चुका है।

राज्यपाल ने कहा कि योग और आयुर्वेद उत्तराखण्ड की आत्मा हैं। राज्य को योग-भूमि और वेलनेस हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखण्ड विश्व को स्वस्थ जीवन शैली का मार्ग दिखाए। देवभूमि उत्तराखण्ड को हमने अध्यात्म का वैश्विक केन्द्र बनाने का संकल्प लिया है, जहाँ शांति की तलाश में आने वाला हर व्यक्ति एक नई ऊर्जा लेकर लौटे।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति और हमारी बेटियाँ शिक्षा, सेना और खेल के मैदान से लेकर उद्यमिता तक, हर क्षेत्र में अपनी सफलता का परचम लहरा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जुड़ी लाखों बहनें आज ‘लखपति दीदी’ बनकर उभर रही हैं। तकनीक और कौशल प्रशिक्षण पाकर वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को संवार रही हैं, और राज्य की अर्थव्यवस्था का इंजन भी बन गई हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से उत्तराखण्ड के शुद्ध और जैविक उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। अब यहाँ के खेतों में उगने वाला मंडुआ, झंगोरा और हस्तशिल्प विदेशों तक पहुँच रहा है। यह ‘वोकल फॉर लोकल’ को ‘ग्लोबल’ बनाने का एक बेहतरीन उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने जिस ‘समान नागरिक संहिता’ का स्वप्न देखा था, उत्तराखण्ड ने उसे धरातल पर उतारकर यह सिद्ध कर दिया है कि एक सशक्त लोकतंत्र में कानून सबके लिए समान होना चाहिए। यूसीसी के माध्यम से उत्तराखण्ड ने अपनी माताओं, बहनों और बेटियों को सुरक्षा और समानता का कानूनी कवच दिया है। उत्तराधिकार, विवाह और अन्य सामाजिक विषयों में भेदभाव को समाप्त कर, राज्य ने महिला सशक्तीकरण को एक नई संवैधानिक ऊँचाई प्रदान की है।

राज्यपाल ने कहा कि कि आज का युग तकनीक का युग है। डिजिटल इंडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी- ये केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि आने वाले दशकों की वास्तविकता हैं। लेकिन हमें समझना होगा कि तकनीक लक्ष्य नहीं, साधन है। तकनीक का उद्देश्य मानव जीवन को सरल, सुरक्षित और सशक्त बनाना है। उत्तराखण्ड में तकनीक का उपयोग प्रशासनिक पारदर्शिता, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा में तेजी से बढ़ रहा है। एआई और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली हमें बेहतर योजना बनाने में सहायता कर रही है। क्वांटम जैसी उन्नत तकनीकों पर आज चर्चा करना, कल की तैयारी है।

राज्यपाल ने कहा भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि सदियों से प्रवाहित एक महान सभ्यता है। किंतु जब हमने अपनी एकता, जागरूकता और सामूहिक शक्ति को कमजोर पड़ने दिया, तब हमें गुलामी की पीड़ा सहनी पड़ी। आज जब हम बाहरी शत्रुओं से निपटने में सक्षम हैं। तब राष्ट्र के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती समाज को बाँटने वाली प्रवृत्तियाँ हैं। इसलिए हमें अत्यंत सतर्क रहना होगा। हमारी जागरूकता और एकजुटता के बल पर ही भारत एक सुरक्षित, अखंड और शक्तिशाली देश बन सकता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए हम सभी को अपने-अपने क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। मातृशक्ति अपनी पारंपरिक कुशलता और नेतृत्व क्षमता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, विशेषकर स्वयं सहायता समूहों को ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को आत्मसात कर नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। युवा नवाचार और कौशल विकास को अपनाकर राज्य को ‘स्टार्टअप हब’ बनाने में योगदान दें, पूर्व सैनिक अपनी विशेषज्ञता का उपयोग युवाओं के चरित्र निर्माण में करें और उद्यमी होम स्टे, और पर्यटन के विविध क्षेत्रों को आगे बढ़ाते हुए निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करें।

राज्यपाल ने कहा कि एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि हमारे संवैधानिक कर्तव्यों के पालन से संभव है। इसलिए हम सभी संविधान में निहित मर्यादाओं का पालन करते हुए अपने कर्तव्यों को जिम्मेदारी से निभाएं और विश्व को मार्ग दिखाने में सक्षम नए भारत के निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।






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